हाउसफुल

Housefull4
#SaharReviewsMovie

#SajidNadiawala Films
#FoxStarStudios

इस फिल्म के बारे में कुछ भी बताने से पहले ये बताता चलूँ कि इसकी कहानी का पिछली हाउसफुल फिल्मों की कहानी से कोई लेना देना नहीं। इसका कहानी वाली फिल्मों से भी कोई लेना देना नहीं।

साजिद नाडियावाला की
#कहानी लन्दन में हैरी (अक्षय) से शुरु होती है जिसे राजा महाराजाओं के सपने आते हैं। जो अपने दो भाई मैक्स (बॉबी) और रॉय (रितेश) के साथ सैलून चलाता है। हैरी के सामने कोई तेज़ आवाज़ हो तो उसकी आँखें बाहर निकल आती हैं, मूंह टेढ़ा हो जाता है और अजीब टिटहरी सी आवाज़ निकालता हुआ रीसेंट का कुछ भूल जाता है। वो भुलक्कड ही नहीं मंदबुद्धि भी है पर ये कॉमेडी(?) का हिस्सा है। मैक्स ताकतवर और सीधा है। रॉय जनानों सी हरकतें करता है। डॉन माइकल का आदमी (मनोज पाहवा) इन तीनों से पांच मिलियन पौंड लेना चाहता है। ये तीनों लन्दन के सबसे अमीर आदमी ठकराल (रंजित) की तीन बेटियों को फंसा के शादी करना चाहते हैं। अब खानदानी गोला (ग्लोब) और पुरवी हवा के चलते ये इन सबको सीतागढ़ (इंडिया बाद में सीतागढ़ पहले) आना पड़ता है जहाँ हैरी को 600 साल पुरानी कहानी याद आती है।

वो निर्दई बाला था, ठकराल तब माधोपुर का राजा था। कृति (कृति सेसन) तब मधु थी। ये दोनों मिलकर मधुबाला थे और ऐसा ही बाकी दोनों के साथ भी था। (ट्रेलर में देखा होगा)

फरहद सामजी, स्पर्श खेतरपाल, सारा बोदिनार और ताशा भाम्बा (और भी कोई हो तो) वगैरह का मिलकर लिखा
#स्क्रीनप्ले बहुत घटिया है। पूरी फिल्म में जो कबूतरों ने बार-बार ‘हगा’ है, वो अक्षय के मूंह पर नहीं स्क्रिप्ट पर हगा है। प्राइवेट गार्डन में खुले घोड़ों को सांप दिख गया,

अच्छा एक तो बॉलीवुड वाले अति करने में इतने माहिर हैं कि किसी भी फिल्म में सांप दिखायेंगे तो वो ‘कोबरे’ से कम नहीं होगा। या तो स्क्रिप्टराइटर्स को और किसी सांप के बारे में पता ही नहीं होता है या कोबरा अपनी श्रेणी का सर्वदा हरक्षेत्र अवेलेबल आलू है।

गार्डन में ट्रेक्टर वाला हल भी रखा है।

फिल्म में चंकी पांडे का एक डायलॉग बहुत सटीक है जब वो 1419 में टोमेटो सौस सर्व कर रहा होता है कि “जब आज के टाइम पे पास्ता पॉसिबल हो गया है तो सौस में क्या दिक्कत है”

कुलमिलाकर माइंडलेस, शेमलेस, वर्कलेस, वर्डलेस कॉमेडी लिखी गयी है जो कुछ एक सीन में हँसा भी देती है।

बाहुबली राजा महाराजा कहानियों का पार्लेजी बनी गयी है। इंटरवल तक की हाउसफुल बाहुबली का म्यूजिक, बाहुबली का सेट, बाहुबली का एक्शन तक की पैरोडी करती, गन्दी पैरोडी करती नज़र आई है।

कुछ एक पंच लाइन्स या सीन्स हँसाते भी हैं जैसे – आख़िरी पास्ता पिछले जन्म में पहला पास्ता था।
बाला की जली, जली, वाला रीमिक्स गाना मज़ेदार है।
जॉनी लीवर की शुरूआती एक्टिंग बढ़िया है।
गामा-मारेगा मज़ेदार सीक्वेंस है

ऐसे ही टुकड़े-टुकड़े में काफी कुछ वन टाइम फन है।

फरहद सामजी का
#डायरेक्शन 600 साल पहले के सेट यानी इंटरवल तक तो ठीक है लेकिन फ़्लैशफ्रंट में बिलकुल बेसिरपैर का है। फिल्म कैसे 90 से 65 दिन में ख़त्म हुई है, ये समझ आता है।

#एक्टिंग सबसे ज़्यादा लाउड और ओवर अक्षय ने की है। बाला के किरदार में वो ठीक लगे हैं पर हैरी में बहुत ओवर हैं। उनकी लिप्स सिंकिंग तक ठीक से नहीं हुई है।
रितेश पर फुटेज कम थी पर उनका एक्ट बढ़िया है। बांगड़ू महाराज बनकर उनका डांस और एक्सप्रेशन परफेक्ट जनाने निकले हैं।बॉबी देओल लगेज की तरह रहे हैं। उनके पास बॉडी और वो भोले हैं। बस।

बॉबी देओल लगेज की तरह रहे हैं। उनके पास बॉडी और वो भोले हैं। बस।

कृति सेनन, पूजा हेगड़े और कृति खरबंदा में ज़्यादा फुटेज सेनन को मिली है क्योंकि वो अक्षय कुमार के साथ थीं।
तीनों ने ओवरएक्टिंग की है। सेनन ने उसमें भी बाजी मार ली है।

रंजित एह्ह्ह्हह एह्ह्ह्हह ही करते रहे हैं।

चंकी पांडे कहीं-कहीं हंसाने की कोशिश करते हैं।

जॉनी लीवर वेस्ट हुए हैं।

राणा दग्गुबाती फिल्म के बेस्ट एक्टर हैं। कालकेय जैसी सेना के राजा बने गामा बढ़िया लगे हैं।

सोहेल सेन, संदीप शिरोडकर और फरहद का
#म्यूजिक भी वाहियात है। ‘बाला-बाला’ का डंका बजाया है, ये सामजी ने खुद लिखा है। ‘एक चुम्मा’ पकाऊ गाना है। ‘छम्मो कहाँ तू’ सुखविंदर ने गाया बहुत अच्छा है और कोरियोग्राफी भी अच्छी हुई है पर समीर ने लिखा बहुत बुरा है। भूतराजा देवी श्रीप्रसाद का रीमिक्स किया गाना है। जुलियस पैकइअम का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है।

#सिनेमेटोग्राफी इंटरवल से पहले, 600 साल पहले वाले शॉट्स में मज़ेदार हुई है। सीजीआई और विएफेक्स साफ़ पता चलता है पर वो फिर भी ठीक लगता है।

#एडिटिंग का क्रेडिट तो रामेश्वर एस भगत को मिला है पर लगता है कैंची सिर्फ अक्षय ने चलाई है। इंटरवल के बाद फिल्मे में कोई कंटेंट बचता ही नहीं है। फिल्म 40 मिनट लम्बी है।

कुलमिलाकर ये वो सरदर्द है जिसे डिस्प्रिन हो या क्रोसिन, पार नहीं पा सकती। पर कोई बात नही, इस साल अक्षय की भी नहीं थी, बोहनी हो गयी। अगली तिमाही में हम फिर अक्षय की वीर सूर्यवंशी लेकर बात करते मिलेंगे, तबतक के लिए इंतेज़ार करेंगे, ह-म लो-ग।

#रेटिंग – 2.5*/10

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कॉमेडी लिखना उतना मुश्किल काम नहीं है जितना कहानी लिखने के बाद उसमें कॉमेडी ठूसना है। ऐसी ठूसा-ठांसी के बाद लोगों का आपकी कॉमेडी पर हँसना ही मुश्किल हो जाता है।

ऐसे में फ़िल्म का ही एक डायलॉग याद आता है तब अक्षय, रितेश और बॉबी तीन कबूतरों से रिक्वेस्ट कर रहे होते हैं कि “हगो, हम पे हगो, हग दो हमारे ऊपर” पर वो तीन कबूतर नील, नितिन और मुकेश नहीं हगते क्योंकि प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और राइटर्स पहले ही उनका काम कर चुके होते हैं।

बर्बाद हुए समय को लानत, मुझे दुआ और रिव्यू को मुहब्बत देना न भूलें

#सहर

 

source https://kuchhkisseunkahe.wordpress.com/2019/10/26/housfull-4-review/

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